विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 30 Oct 2021 08:38 AM IST
सार
प्रदेश सरकार ने दो एजेंसियों एचपीएमसी और हिमफेड के माध्यम से एमआईएस में बागवानों से अभी तक करीब 70 हजार मीट्रिक टन सी ग्रेड का सेब खरीदा है। पिछले साल वर्ष 2020 में 35425.32 मीट्रिक टन सेब खरीदा गया था। इससे पहले साल यानी वर्ष 2019 में 57902.635 मीट्रिक टन सेब एमआईएस में खरीदा था।
हिमाचल के लाखों बागवानों को उपचुनाव के बाद मंडी मध्यस्थता योजना में खरीदे गए सेब का भुगतान होगा। अभी तक एमआईएस से खरीदे सेब का भुगतान देरी से होता रहा है, जबकि इस साल बागवानों को यह भुगतान समय पर किया जाएगा। राज्य में चुनाव आचार संहिता के कारण सरकार भुगतान नहीं कर पाई है। प्रदेश सरकार ने दो एजेंसियों एचपीएमसी और हिमफेड के माध्यम से एमआईएस में बागवानों से अभी तक करीब 70 हजार मीट्रिक टन सी ग्रेड का सेब खरीदा है।
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पिछले साल वर्ष 2020 में 35425.32 मीट्रिक टन सेब खरीदा गया था। इससे पहले साल यानी वर्ष 2019 में 57902.635 मीट्रिक टन सेब एमआईएस में खरीदा था। प्रदेश सरकार ने पिछले साल की बकाया राशि का भुगतान भी कर दिया है, जबकि इस साल बागवानों से खरीदे सेब का भुगतान भी चालू साल में ही किया जाना है। उपचुनाव घोषित होने से पहले बीस करोड़ की राशि दोनों एजेंसियों को कर दिया गया था ताकि सेब की खरीद में कोई बाधा न आए। एचपीएमसी और हिमफेड से कहा गया है कि एमआईएस मे खरीदे सेब के भुगतान के लिए कितनी धनराशि की दरकार है, यह मामला विभाग के पास भेजा जाए। सरकार चाहती हैं कि चालू सीजन में खरीदे सेब का बकाया भुगतान इसी साल में कर दिया जाए ताकि बागवानों को इंतजार न करना पडे़े।
एचपीएमसी खरीदे सेब से बनाता है जूस
एचपीएमसी मंडी मध्यस्थता योजना में खरीदे सेब में से आधे का कंसंट्रेट जूस करता रही है। शेष खरीदे आधे सेब की नीलामी की जाती है।
हिमफेड खरीदे सेब की करता है खुली नीलामी
हिमफेड एमआईएस में खरीदे सेब की खुली नीलामी करता है। सरकार यह सेब बागवानों से 9.50 रुपये प्रतिकि लो के हिसाब से खरीदती है। इसके बाद यह सेब ठेकेदारों नीलामी में 2.50 रुपये प्रतिकिलो की दर से बोली लगाते हैं। इससे होने वाली क्षति की पूर्ति सरकार वित्तीय मदद देती है।
विस्तार
हिमाचल के लाखों बागवानों को उपचुनाव के बाद मंडी मध्यस्थता योजना में खरीदे गए सेब का भुगतान होगा। अभी तक एमआईएस से खरीदे सेब का भुगतान देरी से होता रहा है, जबकि इस साल बागवानों को यह भुगतान समय पर किया जाएगा। राज्य में चुनाव आचार संहिता के कारण सरकार भुगतान नहीं कर पाई है। प्रदेश सरकार ने दो एजेंसियों एचपीएमसी और हिमफेड के माध्यम से एमआईएस में बागवानों से अभी तक करीब 70 हजार मीट्रिक टन सी ग्रेड का सेब खरीदा है।
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पिछले साल वर्ष 2020 में 35425.32 मीट्रिक टन सेब खरीदा गया था। इससे पहले साल यानी वर्ष 2019 में 57902.635 मीट्रिक टन सेब एमआईएस में खरीदा था। प्रदेश सरकार ने पिछले साल की बकाया राशि का भुगतान भी कर दिया है, जबकि इस साल बागवानों से खरीदे सेब का भुगतान भी चालू साल में ही किया जाना है। उपचुनाव घोषित होने से पहले बीस करोड़ की राशि दोनों एजेंसियों को कर दिया गया था ताकि सेब की खरीद में कोई बाधा न आए। एचपीएमसी और हिमफेड से कहा गया है कि एमआईएस मे खरीदे सेब के भुगतान के लिए कितनी धनराशि की दरकार है, यह मामला विभाग के पास भेजा जाए। सरकार चाहती हैं कि चालू सीजन में खरीदे सेब का बकाया भुगतान इसी साल में कर दिया जाए ताकि बागवानों को इंतजार न करना पडे़े।
एचपीएमसी खरीदे सेब से बनाता है जूस
एचपीएमसी मंडी मध्यस्थता योजना में खरीदे सेब में से आधे का कंसंट्रेट जूस करता रही है। शेष खरीदे आधे सेब की नीलामी की जाती है।
हिमफेड खरीदे सेब की करता है खुली नीलामी
हिमफेड एमआईएस में खरीदे सेब की खुली नीलामी करता है। सरकार यह सेब बागवानों से 9.50 रुपये प्रतिकि लो के हिसाब से खरीदती है। इसके बाद यह सेब ठेकेदारों नीलामी में 2.50 रुपये प्रतिकिलो की दर से बोली लगाते हैं। इससे होने वाली क्षति की पूर्ति सरकार वित्तीय मदद देती है।
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