Saturday, October 31, 2026

जुब्बल के सचिन गंगटा ने लद्दाख में रचा इतिहास, 21 दिन में 6000 मीटर से ऊंची 25 चोटियों पर चढ़ाई पूरी की

जुब्बल के कठासू गांव के सचिन गंगटा ने लद्दाख में पूरा किया प्रोजेक्ट चांगथांग,200 किलोमीटर से ज्यादा सफर और 18 हजार मीटर से अधिक ऊंचाई तय की

हिमाचल आजकल

शिमला। शिमला के जुब्बल स्थित कठासू गांव के रहने वाले माउंटेनियर सचिन गंगटा ने लद्दाख के चांगथांग इलाके में 21 दिन में 6000 मीटर से ज्यादा ऊंची 25 चोटियों पर चढ़ाई पूरी की है। हिमालयन जिप्सी के संस्थापक गंगटा ने यह उपलब्धि प्रोजेक्ट चांगथांग के तहत 10 से 30 सितंबर के बीच हासिल की।सचिन के साथ पद्मा नामग्याल गाइड के तौर पर मौजूद रहे। दोनों ने सभी 25 चोटियों की चढ़ाई पूरी की। इस दौरान टीम ने 200 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की और कुल 18 हजार मीटर से ज्यादा ऊंचाई हासिल की।21 दिनों में 16 दिन अलग अलग चोटियों पर चढ़ाई की गई। सबसे ऊंचा कैंप करीब 5560 मीटर की ऊंचाई पर लगाया गया। तेज हवाओं,बेहद ठंड,कम ऑक्सीजन और मुश्किल पहाड़ी रास्तों के बीच यह सफर पूरा हुआ।सचिन के लिए 25 का आंकड़ा खास भी है। उनका जन्म 25 फरवरी को हुआ है और इसी वजह से उन्होंने 25 चोटियों पर चढ़ाई का लक्ष्य रखा था।

सचिन गंगटा संस्थापक हिमालयन जिप्सी ने कहा में ऐसी जगह से आता हूं जहां पहाड़ हमारी जिंदगी का हिस्सा हैं। मेरे लिए यह सिर्फ 25 चोटियों की गिनती नहीं थी। मैं अपने गांव और अपनी जड़ों से जुड़ी एक चीज को लद्दाख के पहाड़ों तक लेकर जाना चाहता था25 फरवरी मेरी जन्मतिथि के नाम 25 चोटियां। 6000 मीटर से ऊपर पहुंचने के बाद संख्या उतनी मायने नहीं रखती। वहां मायने रखता है कि आपमें अगला कदम उठाने की ताकत,अनुशासन और पहाड़ का सम्मान करने की समझ है या नहीं।सभी 25 चोटियों को पूरा करना मेरे लिए गर्व की बात है ।

सचिन ने प्रोजेक्ट चांगथांग को निर्मल पुरजा यानी निम्स दाई की याद और उनसे मिली प्रेरणा को समर्पित किया। सचिन लंबे समय से पुरजा के पर्वतारोहण के तरीके और मुश्किल परिस्थितियों में बड़े लक्ष्य लेने के जज्बे से प्रभावित रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने इस सफर को उनके नाम से जोड़ने का फैसला किया। चांगथांग लद्दाख का ऊंचाई वाला इलाका है और इसकी औसत ऊंचाई करीब 4500 मीटर है। यहां मौसम तेजी से बदल सकता है और कई इलाकों में आम रास्ते और सुविधाएं भी नहीं मिलतीं। सचिन और उनकी टीम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने,आराम करने और अगली चढ़ाई की तैयारी के बीच लगातार तालमेल बनाना पड़ा। इस दौरान करजोक कांगरी,मेंतोक कांगरी ट्रायो 1,2 और 3,ग्यामा साउथ,ग्यामा साउथ ईस्ट,ग्यामा सेंट्रल,ग्यामा ईस्ट,यालुंग नोंग,पोलोगोंका,यालुंग नोंग साउथ,क्यागर कांगरी, चालुंग नॉर्थ,स्पांगनाक कांगरी,स्पांगनाक कांगरी नॉर्थ,थुगजे,चोमो चोंकर 1 और 2, सिरसी कांगरी,जेस री,पॉइंट 6250,पॉइंट 6270 और पॉइंट 6075 समेत कई चोटियों पर चढ़ाई की गई। इसके बाद यूटी कांगरी और एनडीएस कांगरी की चढ़ाई के साथ यह सफर पूरा हुआ। प्रोजेक्ट चांगथांग के दौरान सबसे ऊंचे स्थानों में चालुंग नॉर्थ 6405 मीटर,पोलोगोंका 6390 मीटर,स्पांगनाक कांगरी नॉर्थ 6380 मीटर और स्पांगनाक कांगरी 6370 मीटर शामिल रहे।लद्दाख में ऊंची चोटियों पर पर्वतारोहण को लेकर हाल में एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। 25 सितंबर 2026 को रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एलाइड स्पोर्ट्स की 20 सदस्यीय टीम ने लद्दाख में 23 दिनों के भीतर 6000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली 20 ऐसी चोटियों पर पहली बार चढ़ाई की जिन पर पहले कोई सफल चढ़ाई दर्ज नहीं थी। इस उपलब्धि की आधिकारिक जानकारी प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की ओर से जारी की गई थी। सचिन का प्रोजेक्ट चांगथांग इससे अलग था। उन्होंने 21 दिनों में चांगथांग इलाके में 6000 मीटर से ज्यादा ऊंची 25 चोटियों की चढ़ाई पूरी की। इस उपलब्धि को इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और दूसरे रिकॉर्ड संगठनों के पास जांच और आधिकारिक पुष्टि के लिए भेजा गया है।

कठासू गांव जुब्बल से आने वाले सचिन गंगटा लंबे समय से हिमालय के पहाड़ों,ट्रेकिंग और माउंटेन एक्सप्लोरेशन से जुड़े हैं। हिमालयन जिप्सी के जरिए वह अलग.अलग पहाड़ी इलाकों में ट्रेकिंग और एडवेंचर एक्सपीरियंस से जुड़े काम करते हैं। पहाड़ों के साथ उनका जुड़ाव सिर्फ ट्रेकिंग तक सीमित नहीं हैए बल्कि नए रास्तों और कम एक्सप्लोर किए गए इलाकों को करीब से जानने पर भी उनका फोकस रहता है।हिमालयन जिप्सी के साथ सचिन हिमाचल प्रदेश,उत्तराखंड और नेपाल में ट्रेकिंग,माउंटेन एक्सप्लोरेशन और एडवेंचर ट्रिप्स से जुड़े हैं।

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