Sunday, April 12, 2026

65 हजार करोड़ में से 45 हजार करोड़ का कर्ज जयराम सरकार ने लिया : विक्रमादित्य सिंह

 सबसे खर्चीले मुख्यमंत्री के नाम से जाने जाएंगे जयराम ठाकुर

हिमाचल आजकल

शिमला। प्रदेश कांग्रेस महासचिव विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि जयराम सरकार हिमाचल स्थापना के 75 साल कार्यक्रम और आजादी के अमृतमहोत्सव के नाम पर चुनावी रैलियां कर रही हैं। इन कार्यकार्मों  में पानी  की तरह पैसा बहाया जा रहा है। कार्यक्रमों के आयोजन का काम अपने चहतों को दिया गया है। इन कार्यक्रमों पर करीब 50 करोड़ रूपए खर्च किए जा रहे है।  वे शुक्रवार को शिमला में पत्रकारों से बात कर रहे थे।

उनका कहना है कि जिन स्वतंत्रता सैनानियों ने इस देश को आजाद किया उनका इन कार्यक्रमों में नाम तक नहीं लिया जा रहा है। इसी तरह हिमाचल की स्थापना और इसके विकास में अहम योगदान देने वाली पूर्व सरकारों को याद तक नहीं किया रहा। हिमाचल  निर्माता डा. वाईएस परमार और पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार, प्रेम कुमार धूमल और वीरभद्र सिंह सरकार के इस प्रदेश के निर्माण और विकास में भूमिका को सरकार भुला कर अपना झूठा गुणगान कर रही है। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों में भाजपा के हारे नकारे हुए नेताओं  को बैठाया जा रहा है जबकि स्थानीय कांग्रेस विधायकों को इन कार्यक्रमों में बुलाया तक नहीं जा रहा।

विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि जयराम सरकार  भारी भरकम  खर्च कर रही है।  भाजपा  सरकार ने अपने कार्यकाल में एक हजार से अधिक  गाडिय़ां अपने लोगों के लिए खरीदीं। इसी तरह सरकार ने अन्य फिजूल खर्ची की है जिससे हिमाचल का कर्ज 65  हजार करोड़ रुपए हो गया है। उन्होंने कहा कि 65 हजार करोड़ रुपए में से 45 हजार करोड़ रुपए इसी सरकार ने लिया। अब सरकार फिर 2500 करोड़ रुपए का कर्ज ले रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह जयराम सरकार ने खर्चे किए हैं, उसके चलते आने वाले समय में सबसे ज्यदा खर्चीले मुख्यमंत्री के रूप में जयराम ठाकुर  को  हिमाचल में  याद रखा जाएगा।

धर्मपुर व सिराज से आगे मुख्यमंत्री को कुछ नजर नहीं आता

 विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि कोई भी मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश को होता है, लेकिन जयराम ठाकुर को धर्मपुर और सिराज के आगे कुछ भी नजर नहीं आ रहा। उन्होंने कहा कि मंडी जिला में कोई दुर्घटना होती है तो वहां पर मुख्यमंत्री नहीं पहुंचते। नाचन और थुनाग में हुए हादसे के समय कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा प्रतिभा सिंह पहले मौके पर पहुंची और उनके दुख दर्द में शामिल हुई। जबकि मुख्यमंत्री को यहां से फुर्सत नहीं मिली। उन्होंने  मुख्यमंत्री पर प्रदेश को क्षेत्रवाद के नाम पर बांटने का आरोप लगाया।

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