जिला परिषद चुनाव में मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर
हिमाचल आजकल
शिमला। हिमाचल में पंचायती राज संस्थाओं चुनाव सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है। कांग्रेस व भाजपा के लिए यह चुनाव बड़ी चुनौती से कम नहीं है। पंचायतों के चुनाव के डेढ़ साल बाद प्रदेश विधानसभा के चुनाव होने है। ऐसे में कांग्रेस व भाजपा के इस चुनाव में हल्के से नहीं लेना चाहती है। दोनों ही राजनीतिक दलों ने पंचायती राज संस्था के चुनाव की तैयारियों शुरू कर दी है। खासकर सत्ताधारी कांग्रेस के लिए यह चुनाव काफी अहम माना जा रहा है। इन चुनाव में सरकार के मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है।
सूबे में पंचायतों के चुनाव को लेकर तैयारियों जोरों पर चल रही है।
लिहाजा कांग्रेस व भाजपा पंचायत प्रधान व जिला परिषद के चुनाव पर ज्यादा फोकस कर रही है। जिला परिषद का चुनाव बड़ा माना जाता हे। इसमें कई पंचायतें शामिल होती है। ऐसे में मंत्रियों का जिला परिषद के चुनाव में सीधा दखल रहेगा। जिला परिषद के नतीजे प्रदेश की सियासत की दिशा तय करेगी। यही नहीं इन चुनाव के नतीजों का असर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में दिखने को मिलेगा।

उधर, कांग्रेस व भाजपा ने जिला परिषद के उम्मीदवारों को लेकर मंथन करना शुरू कर दिया है। जिला परिषद के चुनाव पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को उतारा जाएगा। राजनीतिक दलों का मानना है कि जिस व्यक्ति की अपने क्षेत्र में अच्छी पैठ होगी उसे उम्मीदवार बनाया जाएगा। साथ पार्टी के प्रति वफादारी भी उम्मीदवार बनाने का पैमाना होगा। पंचायतों के चुनाव को लेकर कांग्रेस व भाजपा के बड़े नेताओं ने अपने अपने क्षेत्रों में डेरा डालना शुरू कर दिया है। मंत्रियों से लेकर विधायक तक चुनाव में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे है। बताया जा रहा है कि भाजपा ने जिला परिषद के प्रत्याशी को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। सशक्त उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारने को लेकर वार्ड के लोगों की राय जानी जा रही है।


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