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शिमला, 9 नवंबर हिमाचल में इस बार सेब की बंपर फसल हुई है। अब तक देश व प्रदेश की विभिन्न मंडियों में 3 करोड़ सेब की पेटियां पहुंच चुकी है। जबकि सरकार ने इस बार मंडी मध्यस्थता योजना के तहत 72 हजार मीट्रिक टन सी ग्रेड के सेब की खरीद कर दी है। अब केवल किन्नौर जिला में ही सेब सीजन बचा है। सरकार अब बागवानों से 15 नवंबर तक सेब की खरीद करेगी।
सूबे के अधिकतर क्षेत्रों में इस बार ओलों ने सेब की फसल को बर्बाद कर
दिया था। इसके अलावा कई ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बेमौसमी बर्फबारी ने
सेब के पौधों को नुकसान पहुंचाया था। लेकिन इसके बावजूद प्रदेश में सेब
की अच्छी फसल हुई है। इस बार ऊंचाई वाले क्षेत्र के बागवानों को भी सेब
की अच्छे दाम मिले है। अहम बात यह है कि मंडी मध्यस्थता योजना के तहत
सरकार ने अब तक बागवानों से करीब 72 हजार मीट्रिक टन सेब की खरीद कर दी
है। वहीं सरकार ने एमआईएस की खरीद के लिए तारीख आगे बढ़ा दी है। वर्ष
2010 के बाद यह दूसरी बार मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सेब की भारी
मात्रा में खरीद की गई है। इस योजना के तहत वर्ष 2010 में एक लाख मीट्रिक
टन से अधिक सेब की खरीद की गई थी। वहीं दूसरी ओर राज्य से अब तक देश व
प्रदेश की विभिन्न मंडियों में 3 करोड़ सेब की पेटियां पहुंच चुकी है।
पिछले साल के मुकाबले इस बार प्रदेश में सेब की ज्याद पैदावार हुई है।
प्रदेश के किन्नौर जिला में ही अब सेब सीजन बचा है। बागवानी विभाग के
वरिष्ठ विपणन अधिकारी ज्ञान वर्मा का कहना है कि सेब सीजन अब खत्म होने
जा रहा है। केवल किन्नौर जिला में अब करीब 2 लाख सेब की पेटियां बची है।
उनका कहना है कि किन्नौर जिला में 50 लाख सेब की पेटियों का उत्पादन
होता है। पर इस बार मौसम की मार के चलते किन्नौर जिला में सेब के
उत्पादन में भारी कमी आई है। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्देशों के
बाद मंडी मध्यस्थता योजना के तहत अब 15 नवंबर तक सी ग्रेड के सेब की
खरीद की जाएगी।
देश व प्रदेश की मंडियों में पहुंची 3 करोड़ सेब की पेटियां
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