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शिमला। प्रदेश की कृषि जलवायु नकदी फसलों के उत्पादन के लिए अति उत्तम है। इसके अलावा यहां पारंपरिक खेती से भी लाखों परिवार जुड़े हुए हैं। कई क्षेत्रों में किसानों की कड़ी मेहनत से उगाई गई फसलों को बेसहारा व जंगली जानवरों से काफी नुकसान पहुंचता है। इससे बचाव के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना शुरू की है। योजना के अंतर्गत अभी तक करीब 175$ 38 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
इस योजना के तहत कृषकों को सौर ऊर्जा चालित बाड़ लगाने के लिए अनुदान दिया जा रहा है। व्यक्तिगत स्तर पर सौर ऊर्जा बाड़ लगाने के लिए 80 प्रतिशत औा समूह आधारित बाड़बंदी के लिए 85 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान इसमें किया गया है। बाड़ को सौर ऊर्जा से संचारित किया जा रहा है। बाड़ में विद्युत प्रवाह से बेसहारा पशुआें, जंगली जानवरों एवं बंदरों को दूर रखने में मदद मिल रही है।
प्रदेश सरकार ने किसानों की मांग और सुझावों को देखते हुए कांटेदार तार अथवा चेनलिंक बाड़ लगाने के लिए 50 प्रतिशत उपदान और कम्पोजिट बाड़ लगाने के लिए 70 प्रतिशत उपदान का भी प्रावधान किया है। खास बात यह है कि प्रदेश में किसानों का इस योजना के प्रति उत्साह एवं विश्वास लगातार बढ़ा है और लाभार्थियों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ी है। किसानों का कहना है कि जंगली जानवरों विशेष तौर पर बंदरों के उत्पात से फसलें खराब होने के कारण उनका खेती के प्रति उत्साह कम हो गया था, मगर मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना वरदान बनकर आई है। इससे बंदरों के उत्पात से उनकी फसलों का बचाव संभव हुआ है। इसमें सोलर फैंसिंग के साथ-साथ कांटेदार बाड़बंदी का प्रावधान जुडऩे से अन्य जंगली व बेसहारा जानवरों से भी फसल सुरक्षित हुई है। इस योजना के लागू होने के बाद प्रदेश में करीब 4,669$20 हेक्टेयर खेती योग्य भूमि की रक्षा की गई है जो बेसहारा पशुआें, जंगली जानवरों और बंदरों के खतरे के कारण बंजर पड़ी थी। प्रदेश के लगभग 5,535 किसान इस योजना का लाभ उठा चुके हैं।


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