कहा, हमारी इच्छाशक्ति नहीं बिकती, डबल इंजन को पीछे छोड़ सिंगल इंजन सरकार ने दिलाए प्रदेश को चार बड़े हक
हिमाचल आजकल
शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि बीबीएमबी के बकाया बिजली हिस्से को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक जीत हुई हैं। मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर कांग्रेस सरकार की इच्छाशक्ति मजबूत नहीं होती तो हिमाचल को अपने हक का पैसा लेने के लिए 20 साल और इंतजार करना पड़ सकता था। सुक्खू ने किशाऊ बांध समझौते को बीबीएमबी के बकाया भुगतान के मामले में अहम कड़ी बताते हुए कहा कि हरियाणा सरकार से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करवाने की शर्त पर ही समझौते को आगे बढ़ाया गया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बीबीएमबी से अगले 20 वर्षों में हिमाचल को 15 से 20 हजार करोड़ रुपए तक की आय हो सकती है। साथ ही उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि विरोध करने के बजाय प्रदेश के हक की इस लड़ाई का समर्थन करे।
सुक्खू ने कहा कि प्रदेश का यह मामला डिक्री होने के बावजूद करीब 15 वर्षों से लंबित था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही हिमाचल के हक में फैसला दे चुका था तो इतने वर्षों तक प्रदेश को उसका अधिकार क्यों नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में सरकारी इच्छाशक्ति की कमी और समय पर जवाब दाखिल नहीं करने के कारण मामला लगातार लटकता रहा।
मुख्यमंत्री ने इस जीत के पीछे किशाऊ बांध समझौते की भूमिका का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 16 दिसंबर को उन्होंने पत्र लिखकर स्पष्ट किया था कि किशाऊ बांध समझौते को आगे बढ़ाने से पहले हरियाणा सरकार को बीबीएमबी के बकाया भुगतान के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करना होगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक हरियाणा सरकार ने उनकी शर्त स्वीकार की और हलफनामा दाखिल किया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने शुरुआत में हलफनामा देने में आनाकानी की थी और 30 साल तक बिजली हिस्सेदारी बढ़ाने की बात रखी थी, लेकिन हिमाचल ने अपने अधिकारों से समझौता नहीं किया। मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार होती तो हिमाचल को भी किशाऊ बांध के मामले में उत्तराखंड की तरह समझौता करना पड़ सकता था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर लड़ाई लड़कर प्रदेश के अधिकारों को सुरक्षित किया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अगर उनकी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति नहीं होती तो बीबीएमबी का बकाया हासिल करने में 20 साल और लग सकते थे। सुक्खू ने आर्थिक लाभ का जिक्र करते हुए कहा कि अगर बिजली छह रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिकती है तो प्रदेश को करीब 500 करोड़ रुपए मिल सकते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार अधिकतम मूल्य हासिल करने का प्रयास करेगी, जिससे यह राशि करीब एक हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सके। मुख्यमंत्री के अनुसार बीबीएमबी से अगले 20 वर्षों में हिमाचल प्रदेश को 15 से 20 हजार करोड़ रुपये तक की आय होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने इसे पिछले तीन वर्षों में कांग्रेस सरकार की चौथी बड़ी उपलब्धि बताते हुए वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 23 वर्षों से लंबित इस मामले में सरकार ने प्रदेश के खजाने में पैसा पहुंचाया। वहीं करछम-वांगतू जलविद्युत परियोजना में छह प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी के अधिकार को लेकर भी सरकार ने लड़ाई लड़ी, जिससे करीब 150 करोड़ रुपये सालाना प्रदेश को मिलने का दावा किया।


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